Category: हिल स्टेट

May 20, 2014 pcadm 0

बिहू : गौरवपूर्ण परंपरा की पहचान

असम सिर्फ एक प्रदेश का नाम नहीं, प्राकृतिक सौंदर्य, प्रेम, विभिन्न संस्कृतियों इत्यादि की झलक का प्रतीक है। असम की ढेर सारी संस्कृतियों में से बिहू एक ऐसी परंपरा है जो यहां का गौरव है। असम में मनाए जाने वाले बिहू मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं... बैसाख बिहू -…

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March 6, 2014 pcadm 1 0

‘ना वो सब मद्रासी हैं, ना हम सब चिंकी’

पूर्वोत्तर भारत इन दिनों सुर्ख़ियों में ज़रूर है लेकिन इसके बावजूद भारत के अन्य राज्यों में इस क्षेत्र के बारे में न तो अधिक जानकारी है और न ही जानने की इच्छा. राजधानी दिल्ली के नेताओं और लोगों के लिए पूर्वोत्तर राज्य, दिल्ली से काफी दूर हैं. इसी तरह से…

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February 9, 2014 pcadm 0

लद्दाख में आपका स्वागत है।

लामाओं की भूमि लद्दाख आपको प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ रोमांच भी प्रदान करता है. अगर आप सड़क यात्रा द्वारा मनाली से रोहतांग पास होते हुए अपनी यात्रा तय करेंगे तो आपका रास्ता सीढ़ीनुमा होने के साथ-साथ उतराई-चढ़ाई से भरपूर होगा जहाँ रास्ते में आए दर्रे आपको अपने नैसर्गिक सौंदर्य से…

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February 5, 2014 pcadm 0

कुदरत की नायाब इंजीनियरिंग

ये है मेघालय का चेरापूंजी। दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों मे से एक। यहां कुदरत पानी बनकर रास्ता रोकती भी है तो खुद ही पुल बनकर उसे पार भी करा देती है। चेरापूंजी के सघन वन क्षेत्रों में नदियों को पार करने के लिए ऐसे ही पुल बने…

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January 1, 2014 pcadm 5 0

मोनाल: प्रकृति के विविध रंगो का संयोजन

हिमालयी मोनाल जिसे नेपाल और उत्तराखंड में डाँफे के नाम से जानते हैं। यह पक्षी हिमालय पर पाये जाते हैं। यह नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी और उत्तराखण्ड का राज्य पक्षी है। मोनाल फ़ीसण्ट (Pheasant) परिवार का लोफ़ोफ़ोरस (Lophophorus) जीनस का एक पक्षी है। इसकी और बहुत सी उपप्रजातियाँ लोफ़ोफ़ोरस जीनस…

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December 28, 2013 pcadm 0

हमारे पूर्वोत्तर राज्यों को सुखाना चाहता है चीन

चीन तिब्बत के पठार से बहकर भारत आने वाली ब्रह्मपुत्र नदी पर तीन बांध बनाने जा रहा है। वह सिर्फ बांध ही नहीं बना रहा बल्कि ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव को मोड़कर अपने इलाके की ओर करना चाहता है। इससे आने वाले वक्त में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों खासकर अरुणाचल…

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December 2, 2013 pcadm 0

चाँचुरी – कुमाऊँ का नृत्य गीत

चाँचरी – चाँचरी अथवा चाँचुरी कुमाऊँ का समवेत नृत्यगीत है । इस नृत्य की विशेषता यह है कि इसमें वेश-भूषा की चमक-दमक अधिक रहती है । दर्शकों की आँखे नृतकों पर टिकी रहती है । ‘चाँचरी’ और झोड़ा नृत्य देखने में एक सा लगता है परन्तु दोनों की शैलियों में…

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November 30, 2013 pcadm 0

आओ मिलकर झोड़े गाएं

झोड़ा कुमाऊं का सामूहिक नृत्य-गीत है । गोल घेरे में एक दूसरे की कमर अथवा कन्धों में हाथ डाले सभी पुरुषों के मंद, सन्तुलित पद-संचालन से यह नृत्य गीत प्रारम्भ होता है । वृत के बीच में खड़ा हुड़का-वादक गीत की पहली पंक्ति को गाता हुआ नाचता है, जिसे सभी…

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November 28, 2013 pcadm 0

मां नंदा देवी का मेला

कुमाऊँ मंड़ल के अतिरिक्त भी नन्दादेवी समूचे गढ़वाल और हिमालय के अन्य भागों में जन सामान्य की लोकप्रिय देवी हैं। नन्दा की उपासना प्राचीन काल से ही किये जाने के प्रमाण धार्मिक ग्रंथों, उपनिषद और पुराणों में मिलते हैं। नन्दा के इस शक्ति रुप की पूजा गढ़वाल और कुमाऊँ दोनो…

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November 3, 2013 pcadm 0

ऐपण – पहाड़ की रंगोली कला

उत्तरांचल में शुभावसरों पर बनायीं जाने वाली रंगोली को ऐपण कहते हैं। ऐपण कई तरह के डिजायनों से पूर्ण होता है। ऐपण के मुख्य डिजायन -चौखाने , चौपड़ , चाँद, सूरज , स्वस्तिक , गणेश ,फूल-पत्ती, बसंत्धारे तथा पो आदि हैं। ऐपण के कुछ डिजायन अवसरों के अनुसार भी होते…

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